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न्याय घर

घरेलू हिंसा शिकायत कैसे करें: सुरक्षा आदेश कैसे पाएँ

अगर घर में आपके साथ हिंसा हो रही है, तो कानून आपको सुरक्षा, अपने घर में रहने का हक और आर्थिक सहारा देता है। जानिए इसे कदम-दर-कदम कैसे माँगें।

न्याय घर टीमप्रकाशित 7 मिनट में पढ़ें

इस मार्गदर्शिका में

अगर घर में आपके साथ हिंसा हो रही है, तो आप घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत शिकायत कर सकती हैं। आप सीधे मजिस्ट्रेट के पास, या संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता के ज़रिए आवेदन देकर सुरक्षा आदेश, अपने घर में रहने का हक, आर्थिक मदद और बच्चों की कस्टडी माँग सकती हैं।

अगर आप तुरंत ख़तरे में हैं, तो 112 पर कॉल करें। महिला हेल्पलाइन 181 भी आपको आस-पास की मदद तक पहुँचा सकती है। सबसे पहले आपकी सुरक्षा है; कानूनी कदम उसके बाद भी उठाए जा सकते हैं।

आपके साथ जो हो रहा है, उसमें आपका कोई दोष नहीं है, और आपको यह अकेले नहीं झेलना है। यह मार्गदर्शिका आपके विकल्पों को सीधी भाषा में समझाती है, ताकि आप अपने लिए सही फ़ैसला ले सकें।

घरेलू हिंसा में क्या-क्या आता है?

घरेलू हिंसा कानून हिंसा को बहुत व्यापक रूप में देखता है। इसमें शामिल है:

  • शारीरिक हिंसा: मारना, धक्का देना, थप्पड़ मारना या ऐसा कोई भी काम जिससे आपको चोट पहुँचे या आपकी सेहत या जान ख़तरे में पड़े।
  • यौन हिंसा: ऐसा कोई भी यौन व्यवहार जो आपको अपमानित करे, नीचा दिखाए या आपकी गरिमा को ठेस पहुँचाए।
  • मौखिक और भावनात्मक हिंसा: गाली-गलौज, अपमान, मज़ाक उड़ाना, धमकी देना, या दहेज अथवा बेटा न होने जैसी बातों पर ताने मारना।
  • आर्थिक हिंसा: ज़रूरी ख़र्चों के लिए पैसे न देना, आपकी तनख़्वाह, गहने या स्त्रीधन छीन लेना, या आपको ज़बरदस्ती घर से निकालना।

सुरक्षा पाने के लिए शरीर पर चोट के निशान होना ज़रूरी नहीं है। लगातार अपमान करना या पैसों से वंचित रखना भी इस कानून में घरेलू हिंसा है।

घरेलू हिंसा की शिकायत कौन कर सकता है?

यह कानून उस महिला की रक्षा करता है जो हिंसा करने वाले व्यक्ति के साथ घरेलू रिश्ते में है या रही है, और उसके साथ साझा घर में रही है। इसमें शामिल हैं:

  • पत्नी, अपने पति और ससुराल वालों के ख़िलाफ़
  • विवाह जैसे लिव-इन रिश्ते में रहने वाली महिला
  • परिवार के घर में रहने वाली माँ, बहन, बेटी या विधवा

अगर आप घर छोड़ चुकी हैं, तब भी कोई फ़र्क नहीं पड़ता। पहले रहा रिश्ता और पहले रहा साझा घर भी काफ़ी है।

घरेलू हिंसा का केस सिविल है या आपराधिक?

घरेलू हिंसा अधिनियम का केस एक दीवानी (सिविल) उपाय है। इसका मकसद हिंसा रोकना और आपको सहारा देना है, किसी को जेल भेजना नहीं। इसीलिए कई महिलाओं को यह पहला कदम ज़्यादा सहज लगता है।

आपराधिक कानून इससे अलग है। पति या ससुराल वालों की क्रूरता भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 (पुरानी आईपीसी धारा 498ए) के तहत अपराध है, जिसके लिए आप एफआईआर दर्ज करा सकती हैं। अपनी स्थिति के हिसाब से आप घरेलू हिंसा कानून, आपराधिक शिकायत या दोनों का सहारा ले सकती हैं। यह रास्ता चुनने से पहले हमारी एफआईआर कैसे दर्ज करें मार्गदर्शिका पढ़ें।

मजिस्ट्रेट कौन-कौन से आदेश दे सकते हैं?

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मजिस्ट्रेट एक साथ या अलग-अलग कई आदेश दे सकते हैं:

  • संरक्षण आदेश (धारा 18): हिंसा करने वाले को हिंसा करने, आपसे संपर्क करने, आपके कार्यस्थल पर आने या साझा संपत्ति बेचने या किसी और को देने से रोकता है।
  • निवास आदेश (धारा 19): आपको साझा घर से निकाले जाने से बचाता है और हिंसा करने वाले को दूर रहने का निर्देश दे सकता है। धारा 17 आपको साझा घर में रहने का अधिकार देती है, चाहे उस घर में आपका कोई हिस्सा हो या न हो।
  • आर्थिक राहत (धारा 20): हिंसा से हुए ख़र्च और नुकसान के लिए पैसा, जिसमें इलाज का ख़र्च, कमाई का नुकसान और आपके व बच्चों के लिए भरण-पोषण शामिल है।
  • कस्टडी आदेश (धारा 21): बच्चों की अस्थायी कस्टडी।
  • मुआवज़ा आदेश (धारा 22): चोट, मानसिक प्रताड़ना और भावनात्मक पीड़ा के लिए मुआवज़ा।

ज़रूरी हालात में मजिस्ट्रेट दूसरे पक्ष को सुने बिना भी अंतरिम आदेश दे सकते हैं। अगर हिंसा करने वाला संरक्षण आदेश तोड़ता है, तो यह अपने-आप में दंडनीय अपराध है।

घरेलू हिंसा शिकायत कैसे करें: चरण-दर-चरण

  1. पहले अपनी सुरक्षा पक्की करें। ख़तरा हो तो 112 पर कॉल करें। किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएँ, और हो सके तो ज़रूरी कागज़ और फ़ोन अपने पास रखें।
  2. संरक्षण अधिकारी या सेवा प्रदाता से संपर्क करें। इस कानून के तहत हर ज़िले में संरक्षण अधिकारी होते हैं। वे घरेलू घटना रिपोर्ट (डीआईआर) दर्ज कराने, आश्रय या इलाज दिलाने और आवेदन दाखिल करने में मदद करते हैं। आप सीधे किसी वकील या मजिस्ट्रेट की अदालत में भी जा सकती हैं।
  3. धारा 12 के तहत आवेदन दें। मजिस्ट्रेट को दिए आवेदन में लिखा जाता है कि आपके साथ क्या हुआ और आपको कौन-सी राहत चाहिए। आप आम तौर पर वहाँ आवेदन दे सकती हैं जहाँ आप अभी रह रही हैं, भले ही वहाँ कुछ समय के लिए ही हों, या जहाँ हिंसा करने वाला रहता है।
  4. सुनवाई में जाएँ। अदालत दूसरे पक्ष को नोटिस भेजती है। तुरंत सुरक्षा चाहिए तो पहली सुनवाई में ही अंतरिम आदेश माँग सकती हैं।
  5. अंतिम आदेश लें और प्रतियाँ संभालें। हर आदेश की प्रमाणित प्रति अपने पास रखें। आदेश टूटे तो संरक्षण अधिकारी या पुलिस को बताएँ।

कौन-से सबूत काम आते हैं?

शुरुआत के लिए पक्के सबूत ज़रूरी नहीं, लेकिन ये चीज़ें आपके केस को मज़बूत कर सकती हैं:

  • चोटों से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टर की पर्ची
  • चोट या तोड़े गए सामान की तस्वीरें
  • धमकी भरे मैसेज, ईमेल या कॉल रिकॉर्ड
  • तारीख़ के साथ घटनाएँ लिखी एक साधारण डायरी
  • पैसा रोके जाने या छीने जाने को दिखाने वाले बैंक स्टेटमेंट
  • घटनाओं की जानकारी रखने वाले पड़ोसियों, रिश्तेदारों या दोस्तों के नाम

सुझाव: अपने दस्तावेज़ों और सबूतों की प्रतियाँ घर से बाहर किसी सुरक्षित जगह रखें, जैसे किसी भरोसेमंद सहेली के पास या ऐसे ईमेल खाते में जिस तक दूसरे व्यक्ति की पहुँच न हो।

मुफ्त कानूनी मदद उपलब्ध है

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत हर महिला, आमदनी चाहे जितनी हो, मुफ्त कानूनी सहायता की हकदार है। बिना ख़र्च वकील के लिए आप अपने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकती हैं या नालसा हेल्पलाइन 15100 पर कॉल कर सकती हैं। आवेदन का तरीका हमारी मुफ्त कानूनी सहायता मार्गदर्शिका में है।

न्याय घर कैसे मदद कर सकता है

पहला कदम उठाना भारी लग सकता है। न्याय घर पर आप कानूनी सहायता का अनुरोध करके अपनी बात अपने शब्दों में रख सकती हैं। हम आपको ऐसे वकील से जोड़ सकते हैं जो आपके विकल्प समझाए, धारा 12 का आवेदन तैयार करने में मदद करे और ज़रूरत हो तो तुरंत आदेश की माँग करे। आगे क्या करना है, यह फ़ैसला आपका होगा। ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा पारिवारिक कानून पेज देखें। अगर आप शादी ख़त्म करने के बारे में भी सोच रही हैं, तो आपसी सहमति से तलाक वाली मार्गदर्शिका पढ़ें।

यह मार्गदर्शिका सामान्य कानूनी जानकारी है, आपके विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं।

न्याय घर टीम द्वारा संबंधित अधिनियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर, सामान्य जानकारी के लिए लिखी गई। कानून बदलते रहते हैं, इसलिए कोई कदम उठाने से पहले किसी योग्य अधिवक्ता से वर्तमान स्थिति जान लें।

आधिकारिक स्रोत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पति से अलग रहने के बाद भी घरेलू हिंसा का केस कर सकती हूँ?

हाँ। यह कानून उन महिलाओं पर भी लागू होता है जो कभी भी हिंसा करने वाले के साथ साझा घर में रही हों, इसलिए घर छोड़ देने से आपका आवेदन करने का हक ख़त्म नहीं होता।

घरेलू हिंसा अधिनियम में केस करने पर क्या पति गिरफ्तार होगा?

यह केस सिविल प्रकृति का है, इसलिए सिर्फ़ इसे दाखिल करने से गिरफ्तारी नहीं होती। लेकिन संरक्षण आदेश तोड़ना दंडनीय अपराध है, और क्रूरता के लिए बीएनएस धारा 85 के तहत अलग से आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।

क्या घरेलू हिंसा केस के लिए वकील ज़रूरी है?

ज़रूरी नहीं है; संरक्षण अधिकारी आवेदन तैयार करने और दाखिल करने में मदद कर सकते हैं। फिर भी वकील की मदद बहुत काम की होती है, और महिलाएँ विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त वकील पा सकती हैं।

क्या लिव-इन रिश्ते में रहने वाली महिला यह कानून इस्तेमाल कर सकती है?

हाँ, अगर रिश्ता विवाह जैसा था और आप दोनों साझा घर में साथ रहे। ऐसे में आपको भी संरक्षण और आर्थिक राहत जैसे सभी आदेश मिल सकते हैं।

इस कानूनी सेवा के बारे में जानें: पारिवारिक कानून

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हर मामला अलग होता है। हमें बताइए क्या हुआ, हमारी टीम उसकी समीक्षा कर आपको सही अगले कदम की ओर मार्गदर्शन देगी।

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