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न्याय घर

कानूनी दस्तावेज़

आपके हितों की रक्षा करने वाले दस्तावेज़ तैयार करना और उनकी जाँच करना।

ज़रूरी समय-सीमाएँ और नंबर

2 गवाह
वसीयत का प्रमाणन
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत वसीयत पर बनाने वाले के दस्तखत और दो गवाहों का प्रमाणन होता है, जिन्हें उससे लाभ नहीं मिलना चाहिए। मुस्लिम वसीयत पर्सनल लॉ से चलती है।
1 साल
जिन पट्टों का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है
साल-दर-साल, एक साल से ज़्यादा या सालाना किराये वाला पट्टा रजिस्टर्ड होना ज़रूरी है; नोटरी इसकी जगह नहीं ले सकती।
4 महीने
रजिस्ट्रेशन के लिए दस्तावेज़ पेश करना
जिस दस्तावेज़ का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हो, उसे आमतौर पर दस्तखत के चार महीने के भीतर पेश करना होता है।

परिचय

कई विवाद किसी गायब, अस्पष्ट या ठीक से न बने दस्तावेज़ से शुरू होते हैं। अनुबंध, शपथ पत्र, कानूनी नोटिस, वसीयत और मुख्तारनामा यह दर्ज करते हैं कि क्या तय हुआ या क्या घोषित किया गया, और एक साफ़ दस्तावेज़ विवाद रोक सकता है या उसे सुलझाना कहीं आसान बना सकता है।

इस क्षेत्र में क्या-क्या आता है

इस क्षेत्र में लोग अक्सर इस तरह के मामले लेकर हमारे पास आते हैं।

  • किराया अनुबंध

    किराए, डिपॉज़िट, नोटिस और मरम्मत की साफ़ शर्तें, और आपके राज्य के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन।

  • वसीयत

    अपनी इच्छा लिखित में दर्ज करना, आपके दस्तखत और दो गवाहों के प्रमाणन के साथ।

  • शपथ पत्र

    नाम बदलने, पते के सबूत या सरकारी आवेदन जैसे कामों के लिए शपथ लेकर दिया गया बयान।

  • कानूनी नोटिस

    तथ्य, आपकी माँग और समय-सीमा साफ़ लिखना। तय समय-सीमा वाले नोटिस भी इसमें शामिल हैं।

  • मुख्तारनामा

    किसी को अपनी ओर से काम करने का अधिकार देना, ऐसी सीमाओं के साथ जो दस्तावेज़ से साफ़ हों।

  • अनुबंध और समझौते

    कारोबार, उधार और पारिवारिक समझौते के दस्तावेज़, जिनमें ठीक वही लिखा हो जो तय हुआ।

कब मदद की ज़रूरत पड़ सकती है

इनमें से कुछ भी जाना-पहचाना लगे, तो जल्दी मार्गदर्शन लेना मददगार हो सकता है।

  • आप मकान किराए पर दे या ले रहे हैं और किराया अनुबंध चाहिए
  • आप वसीयत बनाना चाहते हैं ताकि परिवार को आपकी इच्छा साफ़ पता रहे
  • नाम बदलने, पते के सबूत या किसी सरकारी आवेदन के लिए शपथ पत्र चाहिए
  • बकाया पैसे या टूटे समझौते के लिए कानूनी नोटिस भेजना है

मामला आमतौर पर कैसे आगे बढ़ता है

यह घटनाओं का सामान्य क्रम है। तथ्यों और आपके राज्य के अनुसार आपका मामला अलग हो सकता है।

  1. 1

    मकसद और दस्तावेज़ का प्रकार

  2. 2

    जानकारी जुटाना

  3. 3

    मसौदा और जाँच

  4. 4

    स्टाम्प, दस्तखत और गवाह

  5. 5

    नोटरी या रजिस्ट्रेशन

न्याय घर कैसे मदद करता है

अपनी बात बताने के बाद आप हमारी टीम से क्या उम्मीद कर सकते हैं।

  • ज़रूरत की पहचान

    हम पता लगाने में मदद करते हैं कि आपके काम के लिए कौन-सा दस्तावेज़ सही है और उसमें क्या होना चाहिए।

  • मसौदे की जाँच

    आपको मिले मसौदे पढ़कर हम अस्पष्ट, एकतरफ़ा या छूटी हुई शर्तों की ओर ध्यान दिलाते हैं, ताकि आप उन्हें उठा सकें।

  • स्टाम्प, रजिस्ट्रेशन और गवाह

    हम बताते हैं कि आपके राज्य में स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, नोटरी या गवाहों की ज़रूरत पड़ सकती है या नहीं।

  • वकील से संपर्क

    ज़रूरी दस्तावेज़ बनवाने या जँचवाने के लिए हम आपको ऐसे दस्तावेज़ तैयार करने वाले वकील से जोड़ते हैं।

ये दस्तावेज़ तैयार रखें

ये सब होना ज़रूरी नहीं। जो आपके पास है, वही बताएँ।

  • दस्तखत करने वाले सभी लोगों के पहचान और पते के सबूत
  • अगर दस्तावेज़ संपत्ति से जुड़ा है तो संपत्ति के कागज़ात
  • दस्तावेज़ का कोई पुराना मसौदा या संस्करण
  • गवाहों के नाम और पते

इन गलतियों से बचें

छोटी-छोटी चूकें, जो बाद में मामले को मुश्किल बना सकती हैं।

  • डाउनलोड किए गए नमूने को अपने तथ्यों और राज्य के हिसाब से बदले बिना इस्तेमाल करना
  • खाली या अधूरे भरे कागज़ पर दस्तखत करना
  • स्टाम्प ड्यूटी छोड़ देना, क्योंकि ड्यूटी और जुर्माना दिए बिना ऐसा दस्तावेज़ सबूत के रूप में शायद न चले
  • अपनी वसीयत से लाभ पाने वाले व्यक्ति को गवाह बनाना

आमतौर पर लागू होने वाले कानून

इस क्षेत्र से जुड़े मुख्य कानून, आसान भाषा में।

  • भारतीय संविदा अधिनियम, 1872

  • भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899

  • रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908

सामान्य प्रश्न

हर स्थिति अलग होती है। ये पृष्ठ इस क्षेत्र को सामान्य रूप से समझाते हैं; आपके मामले की समीक्षा उसके अपने तथ्यों के आधार पर होगी।

क्या वसीयत का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है?

नहीं। रजिस्ट्रेशन वैकल्पिक है, हालाँकि वसीयत पर कभी सवाल उठे तो यह मददगार होता है। वसीयत पर आपके दस्तखत और दो गवाहों का प्रमाणन ज़रूरी है।

क्या वसीयत से लाभ पाने वाला व्यक्ति गवाह बन सकता है?

उसे गवाह नहीं बनना चाहिए। गवाह या उसके जीवनसाथी को वसीयत में दिया गया हिस्सा अमान्य हो जाता है, इसलिए ऐसे गवाह चुनें जिन्हें वसीयत में कुछ नहीं मिल रहा।

क्या नोटरी किया हुआ किराया अनुबंध काफ़ी है?

एक साल से ज़्यादा के पट्टे का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है और नोटरी उसकी जगह नहीं ले सकती। छोटी अवधि के अनुबंध अक्सर नोटरी कराए जाते हैं, और स्टाम्प ड्यूटी के नियम आपके राज्य पर निर्भर हैं।

कानूनी नोटिस में क्या लिखा होना चाहिए?

पूरे तथ्य, आप सामने वाले से क्या चाहते हैं, उचित समय-सीमा, और बात न मानने पर आप क्या कदम उठा सकते हैं। चेक बाउंस जैसे कुछ नोटिस तय समय के भीतर ही भेजने होते हैं।

समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहाँ से करें? हमें बताइए क्या हुआ।

अपनी समस्या अपने शब्दों में लिखें। हमारी टीम उसे पढ़कर आपसे संपर्क करेगी।

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