
आपराधिक कानून
आपराधिक मामले के हर चरण में शिकायतकर्ता, पीड़ित और आरोपी के लिए सहायता।
ज़रूरी समय-सीमाएँ और नंबर
- 24 घंटे
- मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
- गिरफ्तार व्यक्ति को यात्रा का समय छोड़कर 24 घंटे में पेश करना ज़रूरी है (बीएनएसएस धारा 58)।
- 3 दिन
- ई-एफआईआर पर दस्तखत
- इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी गई सूचना पर सूचना देने वाले को 3 दिन के भीतर दस्तखत करने होते हैं।
- 60 या 90 दिन
- डिफ़ॉल्ट जमानत
- अपराध के अनुसार इस अवधि में चार्जशीट दाखिल न होने पर जमानत का रास्ता खुल सकता है (बीएनएसएस धारा 187)।
परिचय
आपराधिक (फौजदारी) कानून चोरी, मारपीट, धोखाधड़ी, उत्पीड़न और धमकी जैसे अपराधों से जुड़ा है। 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) ने पुराने आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम की जगह ले ली है।

इस क्षेत्र में क्या-क्या आता है
इस क्षेत्र में लोग अक्सर इस तरह के मामले लेकर हमारे पास आते हैं।
एफआईआर और पुलिस शिकायत
अपराध की सूचना देना, ज़ीरो एफआईआर, ई-एफआईआर और पुलिस के मना करने पर उठाए जाने वाले कदम।
गिरफ्तारी और हिरासत
गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार, जैसे गिरफ्तारी का कारण जानना और किसी रिश्तेदार या मित्र को सूचना दिलवाना।
जमानत और अग्रिम जमानत
जमानती और गैर-जमानती अपराधों में जमानत कैसे मिलती है, और सत्र न्यायालय या हाईकोर्ट कब जाएँ।
पीड़ितों के लिए सहायता
एफआईआर की मुफ्त प्रति, पात्र लोगों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता और केस की जानकारी रखने के तरीके।
चेक बाउंस की शिकायत
परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत शिकायत, जिसकी समय-सीमाएँ बहुत सख्त हैं।
नोटिस, समन और मुकदमा
पुलिस नोटिस या अदालत के समन का जवाब देना, और फैसले व अपील तक हर चरण को समझना।
कब मदद की ज़रूरत पड़ सकती है
इनमें से कुछ भी जाना-पहचाना लगे, तो जल्दी मार्गदर्शन लेना मददगार हो सकता है।
- आप किसी अपराध की सूचना देना चाहते हैं और एफआईआर दर्ज करवानी है
- पुलिस आपकी शिकायत दर्ज करने से मना कर रही है
- परिवार के किसी सदस्य को गिरफ्तार किया गया है या गिरफ्तारी का डर है
- आपको जमानत या अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करना है
मामला आमतौर पर कैसे आगे बढ़ता है
यह घटनाओं का सामान्य क्रम है। तथ्यों और आपके राज्य के अनुसार आपका मामला अलग हो सकता है।
- 1
पुलिस को सूचना
- 2
जाँच
- 3
गिरफ्तारी और जमानत, जहाँ लागू हो
- 4
पुलिस रिपोर्ट
- 5
आरोप, सुनवाई और फैसला

न्याय घर कैसे मदद करता है
अपनी बात बताने के बाद आप हमारी टीम से क्या उम्मीद कर सकते हैं।
स्थिति को समझना
हम देखते हैं कि क्या हुआ और बताते हैं कि आपके मामले में कौन-सी कानूनी प्रक्रिया लागू हो सकती है।
अपने अधिकार जानना
शिकायतकर्ता, पीड़ित और गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार, जैसे गिरफ्तारी, जमानत और मुफ्त कानूनी सहायता से जुड़े अधिकार, हम आसान भाषा में समझाते हैं।
तथ्य और कागज़ात तैयार करना
हम घटनाओं का क्रम और वे कागज़ात जुटाने में मदद करते हैं जिनकी पुलिस या वकील को ज़रूरत होगी।
वकील से संपर्क
जहाँ पैरवी ज़रूरी हो, वहाँ हम आपको आपराधिक मामलों के अनुभवी वकील से जोड़ते हैं।
ये दस्तावेज़ तैयार रखें
ये सब होना ज़रूरी नहीं। जो आपके पास है, वही बताएँ।
- एफआईआर या लिखित शिकायत की प्रति और मिली हुई पावती
- गिरफ्तारी मेमो, पुलिस नोटिस या अदालत का समन
- चोट लगी हो तो मेडिकल रिपोर्ट और तस्वीरें
- मैसेज, कॉल रिकॉर्ड, ईमेल या वीडियो, बिना किसी बदलाव के
इन गलतियों से बचें
छोटी-छोटी चूकें, जो बाद में मामले को मुश्किल बना सकती हैं।
- ऐसे बयान या कागज़ पर दस्तखत करना जिसे आपने पढ़ा या समझा न हो
- मैसेज, कॉल रिकॉर्ड या वीडियो मिटाना, या देने से पहले उनमें बदलाव करना
- दूसरे पक्ष या किसी गवाह से संपर्क करना या उस पर दबाव डालना
- नोटिस मिलने या गिरफ्तारी का डर होने के बाद भी सलाह लेने में देर करना
आमतौर पर लागू होने वाले कानून
इस क्षेत्र से जुड़े मुख्य कानून, आसान भाषा में।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS)
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस)
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA)
सामान्य प्रश्न
हर स्थिति अलग होती है। ये पृष्ठ इस क्षेत्र को सामान्य रूप से समझाते हैं; आपके मामले की समीक्षा उसके अपने तथ्यों के आधार पर होगी।
क्या किसी भी थाने में एफआईआर दर्ज हो सकती है?
हाँ। ज़ीरो एफआईआर के प्रावधान के तहत पुलिस को संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करनी होती है, भले ही घटना उसके इलाके से बाहर हुई हो; बाद में वह इसे संबंधित थाने को भेज देती है।
पुलिस एफआईआर दर्ज न करे तो क्या करें?
आप सूचना का सार लिखित में पुलिस अधीक्षक (एसपी) को भेज सकते हैं। इसके बाद भी कार्रवाई न हो तो बीएनएसएस की धारा 175(3) (पुरानी सीआरपीसी धारा 156(3)) के तहत मजिस्ट्रेट के पास आवेदन किया जा सकता है।
जमानत और अग्रिम जमानत में क्या अंतर है?
जमानत गिरफ्तारी के बाद हिरासत से रिहाई है। अग्रिम जमानत बीएनएसएस की धारा 482 के तहत सत्र न्यायालय या हाईकोर्ट से मिलने वाला ऐसा निर्देश है कि गिरफ्तारी होने पर आपको जमानत पर छोड़ा जाए।
क्या मुझे एफआईआर की कॉपी मिलेगी?
हाँ। सूचना देने वाले या पीड़ित को एफआईआर की प्रति मुफ्त में पाने का अधिकार है।

समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहाँ से करें? हमें बताइए क्या हुआ।
अपनी समस्या अपने शब्दों में लिखें। हमारी टीम उसे पढ़कर आपसे संपर्क करेगी।
