
उपभोक्ता अधिकार
खराब सामान या सेवा में कमी होने पर उचित समाधान पाने में सहायता।
ज़रूरी समय-सीमाएँ और नंबर
- 2 साल
- शिकायत करने का समय
- शिकायत का कारण पैदा होने से गिना जाता है। पर्याप्त कारण होने पर आयोग बाद में भी शिकायत ले सकता है।
- 50 लाख रुपये
- जिला आयोग की सीमा
- यह सामान या सेवा के लिए दी गई कीमत पर आधारित है। 2 करोड़ तक राज्य आयोग और उससे ऊपर राष्ट्रीय आयोग।
- 5 लाख रुपये
- इस कीमत तक कोई फीस नहीं
- दी गई कीमत इससे ज़्यादा हो तो उसके हिसाब से फीस लगती है।
परिचय
उपभोक्ता कानून तब आपकी रक्षा करता है जब खरीदा गया सामान खराब निकले, सेवा में कमी हो, या विक्रेता अनुचित व्यापार तरीके अपनाए। यह दुकान से या ऑनलाइन खरीदे गए सामान और सेवाओं, जैसे ई-कॉमर्स, बैंकिंग, बीमा, मोबाइल-इंटरनेट, यात्रा और मकान से जुड़ी सेवाओं, सब पर लागू होता है।

इस क्षेत्र में क्या-क्या आता है
इस क्षेत्र में लोग अक्सर इस तरह के मामले लेकर हमारे पास आते हैं।
खराब सामान
ऐसे उत्पाद जो वादे के अनुसार काम न करें, और विक्रेता न ठीक करे, न बदले, न पैसे लौटाए।
सेवा में कमी
पैसे देकर ली गई सेवा में कमी, जैसे मरम्मत, यात्रा या इलाज से जुड़ी सेवाएँ।
अनुचित व्यापार व्यवहार
भ्रामक विज्ञापन, छिपे हुए शुल्क और बिक्री के दूसरे अनुचित तरीके।
ऑनलाइन खरीदारी और रिफंड
जो ऑर्डर आया ही नहीं, अटका हुआ रिफंड और ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ़ शिकायत।
बैंक, बीमा और मोबाइल सेवाएँ
गलत कटौती, खारिज हुए क्लेम और ऐसी सेवाएँ जिनके पैसे तो लिए गए पर सेवा नहीं मिली।
घर खरीदार और बिल्डर
कब्ज़े में देरी और निर्माण की खराबी, जिनके लिए उपभोक्ता आयोग या राज्य रेरा प्राधिकरण जाया जा सकता है।
कब मदद की ज़रूरत पड़ सकती है
इनमें से कुछ भी जाना-पहचाना लगे, तो जल्दी मार्गदर्शन लेना मददगार हो सकता है।
- खरीदा हुआ सामान खराब है और दुकानदार न बदल रहा है, न पैसे लौटा रहा है
- ऑनलाइन ऑर्डर कभी आया ही नहीं, या रिफंड अटका हुआ है
- बिल्डर ने वादे की तारीख पर फ्लैट का कब्ज़ा नहीं दिया
- बीमा क्लेम बिना ठोस कारण के खारिज कर दिया गया
मामला आमतौर पर कैसे आगे बढ़ता है
यह घटनाओं का सामान्य क्रम है। तथ्यों और आपके राज्य के अनुसार आपका मामला अलग हो सकता है।
- 1
कंपनी से शिकायत
- 2
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन
- 3
लिखित नोटिस
- 4
ई-जागृति पर शिकायत
- 5
सुनवाई और आदेश

न्याय घर कैसे मदद करता है
अपनी बात बताने के बाद आप हमारी टीम से क्या उम्मीद कर सकते हैं।
शिकायत की परख
हम देखते हैं कि आपका मामला सामान में खराबी, सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार का है या नहीं।
शुरुआती कदम
कंपनी को साफ़ लिखित शिकायत या नोटिस भेजने में मदद करते हैं और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 की जानकारी देते हैं।
शिकायत दर्ज करने में मार्गदर्शन
कौन-सा उपभोक्ता आयोग लागू होगा, समय-सीमा क्या है और ई-जागृति पर शिकायत कैसे होती है, यह हम समझाते हैं।
वकील से संपर्क
बड़े या उलझे हुए दावों में हम आपको उपभोक्ता मामलों के जानकार वकील से जोड़ते हैं।
ये दस्तावेज़ तैयार रखें
ये सब होना ज़रूरी नहीं। जो आपके पास है, वही बताएँ।
- बिल, इनवॉइस या ऑर्डर कन्फ़र्मेशन
- वारंटी या गारंटी कार्ड और बिक्री या सेवा की शर्तें
- भुगतान का सबूत, जैसे बैंक या यूपीआई स्टेटमेंट
- कंपनी से हुए ईमेल, चैट और शिकायत या टिकट नंबर
इन गलतियों से बचें
छोटी-छोटी चूकें, जो बाद में मामले को मुश्किल बना सकती हैं।
- मामला सुलझने से पहले बिल, पैकिंग या वारंटी कार्ड फेंक देना
- सिर्फ़ फ़ोन पर शिकायत करना और कोई लिखित रिकॉर्ड या टिकट नंबर न रखना
- कंपनी के जवाब के इंतज़ार में दो साल की अवधि निकल जाने देना
- शर्तें लिखवाए बिना आंशिक समझौता मान लेना
आमतौर पर लागू होने वाले कानून
इस क्षेत्र से जुड़े मुख्य कानून, आसान भाषा में।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020
भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा)
सामान्य प्रश्न
हर स्थिति अलग होती है। ये पृष्ठ इस क्षेत्र को सामान्य रूप से समझाते हैं; आपके मामले की समीक्षा उसके अपने तथ्यों के आधार पर होगी।
क्या उपभोक्ता शिकायत के लिए वकील ज़रूरी है?
नहीं। आप खुद शिकायत दर्ज कर सकते हैं और खुद पैरवी कर सकते हैं, ई-जागृति पर ऑनलाइन भी। उलझे हुए या बड़ी रकम वाले मामलों में वकील मदद कर सकता है।
किस उपभोक्ता आयोग में शिकायत करें?
सामान या सेवा के लिए दी गई कीमत 50 लाख रुपये तक हो तो शिकायत जिला आयोग में, 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक राज्य आयोग में और 2 करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय आयोग में जाती है। आप जहाँ रहते या काम करते हैं, वहाँ शिकायत कर सकते हैं।
उपभोक्ता शिकायत की समय-सीमा क्या है?
शिकायत का कारण पैदा होने के दो साल के भीतर शिकायत करनी चाहिए। देरी का पर्याप्त कारण बताने पर आयोग बाद में भी शिकायत स्वीकार कर सकता है।
क्या कोई फीस देनी होती है?
दी गई कीमत 5 लाख रुपये तक हो तो कोई फीस नहीं लगती। इससे ज़्यादा होने पर कीमत के हिसाब से फीस लगती है।

समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहाँ से करें? हमें बताइए क्या हुआ।
अपनी समस्या अपने शब्दों में लिखें। हमारी टीम उसे पढ़कर आपसे संपर्क करेगी।
