इस मार्गदर्शिका में
आरटीआई ऑनलाइन करने के लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के लिए rtionline.gov.in खोलें (राज्य के मामलों में अपने राज्य का आरटीआई पोर्टल), पंजीकरण करें, संबंधित विभाग चुनें, अपने सवाल लिखें, 10 रुपये शुल्क भरें (बीपीएल आवेदकों को छूट है) और आवेदन जमा करें। लोक सूचना अधिकारी को 30 दिन में जवाब देना होता है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 हर नागरिक को यह हक देता है कि वह किसी भी लोक प्राधिकरण से उसके पास मौजूद जानकारी माँग सके। फाइलों की प्रतियाँ, आपके आवेदन पर हुई कार्रवाई का ब्योरा, सरकारी पैसे के खर्च का हिसाब, ऐसी बहुत सी जानकारी आप माँग सकते हैं। इसके लिए न वकील की ज़रूरत है, न यह बताने की कि जानकारी क्यों चाहिए।
आरटीआई कौन दायर कर सकता है और क्या पूछ सकते हैं?
कोई भी भारतीय नागरिक अधिनियम की धारा 6 के तहत आरटीआई आवेदन दे सकता है। आवेदन उस दफ्तर के लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ) को जाता है, जिसके पास वह जानकारी है। आप माँग सकते हैं:
- दस्तावेज़ों, फाइल नोटिंग, पत्रों और आदेशों की प्रतियाँ
- अपने आवेदन, शिकायत, पेंशन या रिफंड की स्थिति
- टेंडर, ठेके, बजट और खर्च का ब्योरा
- जहाँ संभव हो, रिकॉर्ड का निरीक्षण या सामग्री के नमूने
कानून की धारा 8 में कुछ तरह की जानकारी को देने से छूट दी गई है। नवंबर 2025 से धारा 8(1)(j) की छूट व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी सूचना पर लागू है, पर धारा 8(2) के तहत जनहित ज़्यादा बड़ा हो तो जानकारी फिर भी दी जा सकती है। इसलिए पीआईओ आपके सवाल का कुछ हिस्सा मना कर सकता है। ऐसे में इनकार का कारण बताया जाना चाहिए, और आप अपील में उसे चुनौती दे सकते हैं।
आवेदन कहाँ करें: केंद्र का पोर्टल या राज्य का?
पोर्टल इस बात पर निर्भर करता है कि जानकारी किसके पास है।
- केंद्र सरकार के मंत्रालय और विभाग: rtionline.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करें।
- राज्य सरकार के विभाग, नगर निकाय, राज्य विश्वविद्यालय और पुलिस: कई राज्यों के अपने आरटीआई पोर्टल हैं। जहाँ ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है, वहाँ डाक से या दफ्तर में जाकर लिखित आवेदन दिया जा सकता है।
अगर तय न कर पाएँ कि दफ्तर केंद्र का है या राज्य का, तो उसकी वेबसाइट देखें या उसके किसी पत्र का लेटरहेड जाँच लें।
आरटीआई ऑनलाइन आवेदन: चरण दर चरण
नीचे केंद्र सरकार के पोर्टल की प्रक्रिया दी गई है। राज्यों के पोर्टल भी लगभग इसी तरह काम करते हैं, हालाँकि स्क्रीन और भुगतान के विकल्प अलग हो सकते हैं।
- rtionline.gov.in खोलें और अनुरोध जमा करने (सबमिट रिक्वेस्ट) का विकल्प चुनें।
- ईमेल और मोबाइल नंबर से पंजीकरण या लॉग-इन करें, फिर अपना नाम और पता भरें।
- वह मंत्रालय या विभाग चुनें जिससे जानकारी चाहिए। अगर जानकारी उसके अधीन किसी दफ्तर के पास है, तो सबसे नजदीकी विकल्प चुनें।
- अपने सवाल टेक्स्ट बॉक्स में लिखें, या पोर्टल अनुमति दे तो दस्तावेज़ के रूप में अपलोड करें। हर सवाल छोटा रखें और क्रमांक दें।
- अगर आपके पास बीपीएल कार्ड है तो बीपीएल विकल्प चुनें और प्रमाणपत्र की प्रति अपलोड करें। आपको शुल्क नहीं देना होगा।
- 10 रुपये का आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा करें। राज्यों में शुल्क अलग-अलग है, इसलिए अपने राज्य के नियम देख लें।
- आवेदन जमा करें और पंजीकरण संख्या नोट कर लें। पावती को पीडीएफ या स्क्रीनशॉट के रूप में सहेज लें।
इसी पंजीकरण संख्या से आप बाद में स्थिति देख सकते हैं और उसी पोर्टल से प्रथम अपील भी दायर कर सकते हैं।
ऐसे सवाल कैसे लिखें कि काम का जवाब मिले
जवाब उतना ही अच्छा होगा जितना सवाल। कुछ बातें ध्यान रखें:
- राय नहीं, रिकॉर्ड माँगें। "मेरी पेंशन क्यों रुकी है?" की जगह "मेरे फलां तारीख के पेंशन आवेदन पर हुई फाइल नोटिंग की प्रति दें" लिखना ज्यादा असरदार है।
- तारीख, संदर्भ संख्या, योजना या दफ्तर का नाम ज़रूर लिखें।
- बड़े अनुरोध को कुछ क्रमवार सवालों में बाँट दें।
- आरोप या लंबी पृष्ठभूमि न लिखें। पीआईओ को केवल वही जानकारी देनी होती है जो रिकॉर्ड में मौजूद है।
जानकारी माँगने का कारण बताने की कोई ज़रूरत नहीं है। कानून इसकी माँग नहीं करता।
सुझाव: आवेदन से पहले लिख लें कि जवाब का आप क्या करेंगे। अगर किसी मुकदमे या शिकायत में सबूत चाहिए, तो सामान्य स्पष्टीकरण के बजाय खास दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रतियाँ माँगें।
पीआईओ को कितने दिन में जवाब देना होता है?
धारा 7 के तहत पीआईओ को आवेदन मिलने के 30 दिन के भीतर जवाब देना होता है। अगर जानकारी किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी है, तो जवाब 48 घंटे में देना ज़रूरी है। अगर पीआईओ प्रतियों के लिए अतिरिक्त शुल्क माँगता है, तो उसे बताना चाहिए कि रकम कैसे तय की गई।
अगर 30 दिन में कोई जवाब न आए, तो इसे इनकार मानें और प्रथम अपील की तैयारी करें।
जवाब न मिले या अधूरा मिले तो क्या करें?
कानून में अपील के दो स्तर हैं, और दोनों के लिए वकील ज़रूरी नहीं।
प्रथम अपील
धारा 19(1) के तहत, जवाब की तय तारीख बीतने या असंतोषजनक जवाब मिलने के 30 दिन के भीतर आप प्रथम अपीलीय अधिकारी (एफएए) के पास प्रथम अपील दायर कर सकते हैं। एफएए आम तौर पर उसी विभाग का वरिष्ठ अधिकारी होता है। rtionline.gov.in पर मूल पंजीकरण संख्या से ही प्रथम अपील दायर की जा सकती है। संक्षेप में लिखें कि क्या माँगा था, क्या मिला और वह क्यों अधूरा है।
द्वितीय अपील
अगर एफएए फैसला न करे या आप उसके फैसले से संतुष्ट न हों, तो 90 दिन के भीतर केंद्रीय सूचना आयोग (केंद्र के विभागों के लिए) या राज्य सूचना आयोग (राज्य के विभागों के लिए) में द्वितीय अपील दायर कर सकते हैं। साथ में अपना आवेदन, पीआईओ का जवाब, प्रथम अपील और एफएए का आदेश (यदि हो) लगाएं।
इन आम गलतियों से बचें
- केंद्र का आरटीआई राज्य के विभाग को भेज देना, या इसका उल्टा
- ऐसी जानकारी माँगना जो रिकॉर्ड में होती ही नहीं, जैसे कारण या राय
- प्रथम अपील की 30 दिन की समय सीमा चूक जाना
- पंजीकरण संख्या और भुगतान की रसीद न रखना
- कई अलग-अलग विषयों को एक ही लंबे आवेदन में भर देना
न्याय घर कैसे मदद कर सकता है
साधारण आरटीआई ज्यादातर लोग खुद दायर कर लेते हैं। मदद तब काम आती है जब जानकारी किसी विवाद, लंबित मुकदमे या लंबी देरी से जुड़ी हो, या जब प्रथम या द्वितीय अपील ठोस ढंग से लिखनी हो। न्याय घर के ज़रिए आप कानूनी सहायता का अनुरोध कर सकते हैं और आरटीआई मामलों पर काम करने वाले अधिवक्ता से जुड़ सकते हैं। अगर मिली जानकारी किसी सामान या सेवा की खामी की ओर इशारा करे, तो उपभोक्ता शिकायत ऑनलाइन कैसे करें पढ़ें। खर्च की चिंता हो तो जानिए मुफ्त कानूनी सहायता कैसे मिलती है।
यह मार्गदर्शिका सामान्य कानूनी जानकारी है, आपके विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं।
न्याय घर टीम द्वारा संबंधित अधिनियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर, सामान्य जानकारी के लिए लिखी गई। कानून बदलते रहते हैं, इसलिए कोई कदम उठाने से पहले किसी योग्य अधिवक्ता से वर्तमान स्थिति जान लें।
आधिकारिक स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या आरटीआई दायर करने का कारण बताना ज़रूरी है?
नहीं। सूचना का अधिकार कानून आपसे यह नहीं पूछता कि जानकारी क्यों चाहिए। केवल संपर्क का ब्योरा देना होता है ताकि जवाब आप तक पहुँच सके।
राज्य सरकार के विभागों में आरटीआई की फीस कितनी है?
10 रुपये का शुल्क केंद्र सरकार के निकायों पर लागू है। हर राज्य अपना शुल्क और भुगतान का तरीका खुद तय करता है, इसलिए आवेदन से पहले राज्य के नियम या पोर्टल देख लें।
क्या राज्य के विभाग के लिए भी आरटीआई ऑनलाइन हो सकती है?
हाँ, अगर आपके राज्य का आरटीआई पोर्टल है। जहाँ पोर्टल नहीं है, वहाँ आवेदन डाक से भेजें या लोक सूचना अधिकारी के दफ्तर में जमा करें।
क्या आरटीआई आवेदन या अपील के लिए वकील ज़रूरी है?
नहीं। आवेदन, प्रथम अपील और द्वितीय अपील, तीनों आप खुद दायर कर सकते हैं। जब जानकारी किसी विवाद या लंबित मुकदमे से जुड़ी हो, तब अधिवक्ता की मदद उपयोगी रहती है।
अपनी स्थिति में मदद चाहिए?
हर मामला अलग होता है। हमें बताइए क्या हुआ, हमारी टीम उसकी समीक्षा कर आपको सही अगले कदम की ओर मार्गदर्शन देगी।




