इस मार्गदर्शिका में
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी के तहत आपसी सहमति से तलाक तब संभव है जब पति-पत्नी कम से कम एक साल से अलग रह रहे हों और दोनों शादी ख़त्म करने पर राज़ी हों। पहले फ़ैमिली कोर्ट में संयुक्त याचिका (फ़र्स्ट मोशन) दी जाती है, फिर छह महीने बाद सेकंड मोशन, जिसकी प्रतीक्षा अदालत माफ़ भी कर सकती है।
शादी ख़त्म करने का फ़ैसला आसान नहीं होता, भले ही दोनों सहमत हों। अच्छी बात यह है कि आपसी सहमति से तलाक में आप सम्मान के साथ अलग हो सकते हैं, मामले आपस में सुलझा सकते हैं और लंबे विवादित मुकदमे से बच सकते हैं। यह मार्गदर्शिका आपको पूरी प्रक्रिया समझाती है।
आपसी सहमति से तलाक कौन ले सकता है?
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13बी हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदाय पर लागू होती है। अगर आपकी शादी विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत हुई या रजिस्टर हुई है, तो उस कानून की धारा 28 में इसी तरह की प्रक्रिया है। मुस्लिम, ईसाई या पारसी जैसे दूसरे पर्सनल लॉ वाले दंपतियों के नियम अलग हैं, इसलिए अपनी शादी पर लागू कानून ज़रूर देखें।
आपसी तलाक की शर्तें क्या हैं?
धारा 13बी के तहत आप दोनों को अदालत के सामने यह दिखाना होता है कि:
- याचिका दाखिल करने से पहले आप कम से कम एक साल से अलग रह रहे हैं
- आप साथ नहीं रह पा रहे हैं
- आप दोनों इस बात पर सहमत हैं कि शादी ख़त्म कर दी जाए
"अलग रहने" का मतलब है पति-पत्नी की तरह साथ न रहना। अगर किसी मजबूरी में आप अब भी एक ही घर में रहते हैं, तो याचिका देने से पहले इस बारे में वकील से बात कर लें।
सहमति पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए। दबाव, धमकी या धोखे से ली गई सहमति मान्य नहीं है, और अदालत इसकी जाँच करती है।
याचिका से पहले शर्तें तय कर लें
आपसी तलाक का असली आधार आप दोनों के बीच का समझौता है। इन बातों पर चर्चा करके उन्हें लिखित में रखें:
- गुज़ारा भत्ता या भरण-पोषण: एकमुश्त रकम होगी या किस्तों में, और भुगतान कब-कब होगा
- बच्चों की कस्टडी और मुलाकात: बच्चे किसके साथ रहेंगे, दूसरे माता या पिता उनसे कैसे मिलेंगे, और उनकी पढ़ाई व ख़र्च में किसका कितना योगदान होगा
- स्त्रीधन और उपहार: पत्नी के गहने, उपहार और निजी सामान की वापसी
- संपत्ति और साझा कर्ज़: कौन-सी संपत्ति किसके पास रहेगी और साझा लोन कौन चुकाएगा
- चल रहे मुकदमे: आपस के दूसरे मुकदमे वापस लिए जाएँगे या नहीं
कई दंपति ये शर्तें एक लिखित समझौते में दर्ज करते हैं। कुछ मुद्दों पर बात अटक जाए तो अदालत या मध्यस्थता केंद्र की मध्यस्थता मदद कर सकती है।
सुझाव: फ़र्स्ट मोशन से पहले यह पक्का कर लें कि हर शर्त साफ़ और व्यावहारिक है। भुगतान को हिस्सों में बाँटना आम है, जैसे कुछ रकम फ़र्स्ट मोशन पर और बाकी सेकंड मोशन पर, ताकि दोनों को भरोसा रहे कि समझौता निभाया जाएगा।
आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया: चरण-दर-चरण
- सहमति बनाएँ और तैयारी करें। ऊपर बताई शर्तें तय करें और दस्तावेज़ जुटाएँ।
- संयुक्त याचिका तैयार कराएँ। वकील हलफ़नामों के साथ संयुक्त याचिका बनाते हैं, जिसमें शादी का ब्योरा, अलग रहने की अवधि और तय शर्तें लिखी होती हैं।
- फ़र्स्ट मोशन दाखिल करें। याचिका उस फ़ैमिली कोर्ट (जहाँ फ़ैमिली कोर्ट न हो वहाँ जिला अदालत) में दी जाती है जिसका क्षेत्राधिकार हो, आम तौर पर जहाँ शादी हुई, जहाँ आप आखिरी बार साथ रहे, या जहाँ पत्नी अभी रहती है।
- अदालत में पेश हों। आम तौर पर दोनों को ख़ुद हाज़िर होना पड़ता है। अदालत आपके बयान दर्ज करती है और संतुष्ट होने पर फ़र्स्ट मोशन पर आदेश देती है।
- प्रतीक्षा अवधि। कानून फ़र्स्ट मोशन के बाद छह महीने का समय देता है, ताकि आप फ़ैसले पर फिर से सोच सकें। सेकंड मोशन याचिका दाखिल होने के छह महीने बाद और 18 महीने के भीतर देना होता है।
- सेकंड मोशन दाखिल करें। दोनों पुष्टि करते हैं कि वे अब भी तलाक चाहते हैं और समझौते की शर्तें कायम हैं।
- तलाक की डिक्री। संतुष्ट होने पर अदालत शादी ख़त्म करने की डिक्री देती है। इसकी प्रमाणित प्रति लेकर सुरक्षित रखें।
क्या छह महीने की प्रतीक्षा अवधि माफ़ हो सकती है?
हाँ, उचित मामलों में। अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर (2017) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छह महीने की अवधि अनिवार्य नहीं है और अदालत इसे माफ़ कर सकती है। अदालतें आम तौर पर देखती हैं कि क्या आप पहले से लंबे समय से अलग रह रहे हैं, सुलह और मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं, और गुज़ारा भत्ता व कस्टडी जैसे सभी मुद्दे सच में सुलझ गए हैं। फ़र्स्ट मोशन दाखिल करने के बाद आप यह छूट माँगने का आवेदन दे सकते हैं।
अगर कोई एक पक्ष अपना मन बदल ले तो?
डिक्री होने से पहले पति या पत्नी में से कोई भी अपनी सहमति वापस ले सकता है। ऐसा होने पर अदालत आपसी सहमति से तलाक नहीं दे सकती। तब दूसरे पक्ष को कानून में दिए आधारों पर विवादित तलाक का रास्ता देखना पड़ सकता है, जिसमें आम तौर पर ज़्यादा समय लगता है। यही वजह है कि शुरुआत में ही समझौते पर पूरी गंभीरता से काम करना चाहिए।
आपसी तलाक के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
- शादी का सबूत, जैसे विवाह प्रमाणपत्र, शादी का कार्ड या तस्वीरें
- दोनों पति-पत्नी के पहचान और पते के प्रमाण
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- कम से कम एक साल से अलग रहने का सबूत, अगर उपलब्ध हो
- आमदनी, संपत्ति और देनदारियों का ब्योरा
- बच्चों का ब्योरा, अगर बच्चे हों
- हस्ताक्षरित समझौते की शर्तें
न्याय घर कैसे मदद कर सकता है
ठीक से तैयार की गई याचिका और साफ़ समझौता प्रक्रिया को आसान बनाते हैं और आगे चलकर दोनों की रक्षा करते हैं। न्याय घर के ज़रिए आप कानूनी सहायता का अनुरोध कर सकते हैं और ऐसे वकील से जुड़ सकते हैं जो आपकी शादी पर लागू कानून समझाए, संयुक्त याचिका और समझौता तैयार करे और दोनों मोशन में मार्गदर्शन दे। हमारा पारिवारिक कानून पेज देखें। अगर घर में आपके साथ हिंसा हो रही है, तो घरेलू हिंसा शिकायत कैसे करें ज़रूर पढ़ें, और वकील से मिलने की तैयारी के लिए हमारी वकील से पहली मुलाकात चेकलिस्ट देखें।
यह मार्गदर्शिका सामान्य कानूनी जानकारी है, आपके विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं।
न्याय घर टीम द्वारा संबंधित अधिनियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर, सामान्य जानकारी के लिए लिखी गई। कानून बदलते रहते हैं, इसलिए कोई कदम उठाने से पहले किसी योग्य अधिवक्ता से वर्तमान स्थिति जान लें।
आधिकारिक स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपसी सहमति से तलाक में कितना समय लगता है?
कानून फ़र्स्ट और सेकंड मोशन के बीच छह महीने का अंतर रखता है, इसलिए आम तौर पर कम से कम इतना समय और अदालत की तारीख़ों का समय लगता है। अदालत प्रतीक्षा अवधि माफ़ कर दे तो प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकती है।
क्या पति-पत्नी दोनों का अदालत में मौजूद होना ज़रूरी है?
अदालतें आम तौर पर फ़र्स्ट और सेकंड मोशन में दोनों की हाज़िरी चाहती हैं ताकि सहमति की पुष्टि हो सके। ख़ास हालात में आपकी अदालत कोई और व्यवस्था मानती है या नहीं, यह अपने वकील से पूछें।
क्या शादी के कुछ ही समय बाद आपसी तलाक लिया जा सकता है?
धारा 13बी के तहत याचिका देने से पहले कम से कम एक साल अलग रहना ज़रूरी है। इसलिए अलग होने के पहले साल के भीतर यह याचिका दाखिल नहीं हो सकती।
क्या आपसी तलाक में दोनों के अलग-अलग वकील होने चाहिए?
कानून में यह ज़रूरी नहीं है, और कुछ दंपति याचिका के लिए एक ही वकील रखते हैं। फिर भी कई लोग चाहते हैं कि दोनों अलग-अलग सलाह लें, ताकि समझौता दोनों के लिए न्यायसंगत रहे।
अपनी स्थिति में मदद चाहिए?
हर मामला अलग होता है। हमें बताइए क्या हुआ, हमारी टीम उसकी समीक्षा कर आपको सही अगले कदम की ओर मार्गदर्शन देगी।




