इस मार्गदर्शिका में
भारत में गिरफ्तारी होने पर आपको गिरफ्तारी का कारण जानने, यह जानने कि जमानत मिल सकती है या नहीं, किसी रिश्तेदार या दोस्त को सूचना दिलवाने, पूछताछ के दौरान वकील से मिलने, मेडिकल जाँच और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने का अधिकार है। वकील का खर्च न उठा सकें, तो मुफ्त वकील मिल सकता है।
ये अधिकार कहाँ से आते हैं?
गिरफ्तारी के समय आपके अधिकार मुख्य रूप से तीन जगह से आते हैं:
- संविधान का अनुच्छेद 22, जो गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए लोगों की रक्षा करता है। इसमें गिरफ्तारी का कारण जानने, अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने का अधिकार शामिल है।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), जिसने 1 जुलाई 2024 से सीआरपीसी की जगह ली है और जो तय करती है कि पुलिस गिरफ्तारी कैसे करेगी।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले, खास तौर पर डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997), जिसमें हर गिरफ्तारी के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तय किए गए।
ये अधिकार हर व्यक्ति पर लागू होते हैं, चाहे वह दोषी हो या नहीं। इनका मकसद गैरकानूनी हिरासत, यातना और ताकत के दुरुपयोग को रोकना है।
गिरफ्तारी के समय आपके मुख्य अधिकार
1. गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार
पुलिस को आपको उस अपराध का पूरा ब्योरा या गिरफ्तारी के अन्य आधार बताने होंगे (बीएनएसएस धारा 47)। यह अनुच्छेद 22 के तहत संवैधानिक अधिकार भी है।
नवंबर 2025 में मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हर अपराध में गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप में, आपकी समझ की भाषा में देना होगा। केवल असाधारण मामलों में, जैसे कोई अपराध करते हुए पकड़ा जाए, पहले मौखिक रूप से बताया जा सकता है। तब लिखित कारण उचित समय में, और रिमांड के लिए पेशी से कम से कम 2 घंटे पहले देना ज़रूरी है। ऐसा न होने पर गिरफ्तारी और रिमांड अवैध ठहराए जा सकते हैं।
2. जमानत के बारे में जानने का अधिकार
अगर आपको जमानती अपराध में गिरफ्तार किया गया है, तो पुलिस को बताना होगा कि आप जमानत पर रिहा होने के हकदार हैं और जमानतदार का इंतज़ाम कर सकते हैं (बीएनएसएस धारा 47)। जमानती और गैर-जमानती अपराध का फर्क समझने के लिए पढ़ें: जमानत और अग्रिम जमानत की पूरी जानकारी।
3. परिवार या दोस्त को सूचना दिलवाने का अधिकार
आप किसी रिश्तेदार, दोस्त या अन्य व्यक्ति का नाम बता सकते हैं, जिसे आपकी गिरफ्तारी और आपको कहाँ रखा गया है, इसकी सूचना दी जानी चाहिए (बीएनएसएस धारा 48)। पुलिस को यह भी दर्ज करना चाहिए कि सूचना दे दी गई है।
4. गिरफ्तारी मेमो
बीएनएसएस धारा 36 और डी.के. बसु दिशानिर्देशों के अनुसार गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को गिरफ्तारी की तारीख और समय के साथ गिरफ्तारी मेमो बनाना होता है। इस पर कम से कम एक गवाह, जैसे परिवार का सदस्य या इलाके का कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति, के हस्ताक्षर होने चाहिए और आपके भी जवाबी हस्ताक्षर होने चाहिए। गिरफ्तारी करने वाले पुलिसकर्मियों को अपने नाम के साथ सही और साफ दिखने वाली पहचान पहननी चाहिए।
5. वकील से मिलने का अधिकार
पूछताछ के दौरान आपको अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार है, हालाँकि ज़रूरी नहीं कि पूरी पूछताछ के दौरान वकील साथ रहे (बीएनएसएस धारा 38)। साफ शब्दों में अपने वकील की माँग करें, और अगर आपके पास उनका नाम और नंबर है तो पुलिस को दें।
6. मेडिकल जाँच का अधिकार
गिरफ्तारी के तुरंत बाद मेडिकल अधिकारी से गिरफ्तार व्यक्ति की जाँच कराई जानी चाहिए (बीएनएसएस धारा 53)। महिला के शरीर की जाँच केवल महिला डॉक्टर द्वारा या उनकी देखरेख में होती है। रिपोर्ट की प्रति आपको या आपके नामित व्यक्ति को मिलनी चाहिए। इससे आपकी सेहत की सुरक्षा होती है और गिरफ्तारी के समय की किसी चोट का रिकॉर्ड भी बनता है। अगर आपको चोट है या तबीयत ठीक नहीं है, तो बताएं।
7. 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
पुलिस आपको मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए बिना 24 घंटे से ज़्यादा हिरासत में नहीं रख सकती। इसमें गिरफ्तारी की जगह से अदालत तक पहुँचने में लगा समय नहीं गिना जाता (बीएनएसएस धारा 58 और अनुच्छेद 22(2))। इससे ज़्यादा हिरासत के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश ज़रूरी है।
8. मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार
अगर आप वकील का खर्च नहीं उठा सकते, तो आपको मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत हिरासत में मौजूद व्यक्ति इसके पात्र हैं। पहली पेशी पर आप मजिस्ट्रेट को बता सकते हैं कि आपको वकील चाहिए, या आपका परिवार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) से संपर्क कर सकता है। नालसा की हेल्पलाइन 15100 है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: मुफ्त कानूनी सहायता कैसे पाएँ।
9. खुद के खिलाफ गवाही के लिए मजबूर न किए जाने का अधिकार
संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत किसी अपराध के आरोपी को खुद अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करें, लेकिन आपसे ज़बरदस्ती अपराध कबूल नहीं करवाया जा सकता।
महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा
किसी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसा हो सकता है, और वह भी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति से (बीएनएसएस धारा 43(5))। गिरफ्तारी महिला पुलिस अधिकारी को करनी चाहिए या उसकी मौजूदगी में होनी चाहिए। अगर इन नियमों का पालन न हो, तो ब्योरा नोट करें और अपने वकील व मजिस्ट्रेट को बताएं।
आपकी या परिवार के किसी सदस्य की गिरफ्तारी हो तो क्या करें
- शांत रहें और विरोध न करें। शारीरिक विरोध से नए आरोप लग सकते हैं और आपकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
- गिरफ्तारी का कारण लिखित में माँगें, और यह भी कि आपको किस थाने ले जाया जाएगा।
- किसी रिश्तेदार या दोस्त का नाम बताएँ, जिसे धारा 48 के तहत सूचना दी जाए।
- गिरफ्तारी मेमो देखें और उस पर हस्ताक्षर करें, और जाँच लें कि तारीख और समय सही लिखा है।
- अपने वकील की माँग करें, या पुलिस और मजिस्ट्रेट को बताएँ कि आपको कानूनी सहायता चाहिए।
- कोई चोट या बीमारी हो तो बताएँ और मेडिकल जाँच की माँग करें।
- खाली कागज़ों पर या बिना पढ़े-समझे बयान पर हस्ताक्षर न करें।
- परिवार वाले: समय, पुलिसकर्मियों के नाम, थाना और बताई गई धाराएँ नोट करें, और जमानत के लिए जल्द वकील से संपर्क करें।
सावधानी: कोई भी कागज़ पूरा पढ़े बिना उस पर हस्ताक्षर न करें। अगर आप पढ़ नहीं सकते, तो उसे पढ़कर सुनाने को कहें, और अगर आप पर किसी कागज़ पर हस्ताक्षर का दबाव डाला गया हो, तो पहली पेशी पर मजिस्ट्रेट को यह बात बताएं।
अगर आपके अधिकारों का उल्लंघन हो तो?
अगर पुलिस इन नियमों का पालन न करे, तो पेशी के समय मजिस्ट्रेट को और अपने वकील को बताएं। नियमों के उल्लंघन से हिरासत की वैधता पर सवाल उठ सकता है, और गैरकानूनी हिरासत या हिरासत में दुर्व्यवहार के गंभीर मामले हाईकोर्ट में उठाए जा सकते हैं। सही उपाय क्या होगा, यह आपके वकील बता सकते हैं। जितनी जल्दी हो सके, समय, नाम और घटनाओं का ब्योरा लिख लें।
न्याय घर कैसे मदद कर सकता है
गिरफ्तारी उस व्यक्ति और पूरे परिवार के लिए डराने वाला अनुभव होता है। ऐसे में सही जानकारी के साथ जल्दी कदम उठाना ज़रूरी है। न्याय घर के ज़रिए आप कानूनी सहायता का अनुरोध कर सकते हैं और किसी योग्य वकील से जुड़ सकते हैं, जो आरोप समझा सकते हैं, देख सकते हैं कि आपके अधिकारों का पालन हुआ या नहीं, और जमानत की अर्ज़ी में मदद कर सकते हैं। ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा आपराधिक कानून सेवा क्षेत्र देखें।
यह मार्गदर्शिका सामान्य कानूनी जानकारी है, आपके विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं।
न्याय घर टीम द्वारा संबंधित अधिनियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर, सामान्य जानकारी के लिए लिखी गई। कानून बदलते रहते हैं, इसलिए कोई कदम उठाने से पहले किसी योग्य अधिवक्ता से वर्तमान स्थिति जान लें।
आधिकारिक स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पुलिस बिना कारण बताए गिरफ्तार कर सकती है?
नहीं। संविधान के अनुच्छेद 22 और बीएनएसएस धारा 47 के तहत आपको गिरफ्तारी का कारण बताया जाना ज़रूरी है। सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर 2025 में कहा कि असाधारण मामलों को छोड़कर यह कारण लिखित में, आपकी समझ की भाषा में देना होगा।
पुलिस मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए बिना कितनी देर रख सकती है?
अदालत तक पहुँचने में लगने वाले समय को छोड़कर 24 घंटे से ज़्यादा नहीं। इससे आगे हिरासत के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए।
क्या गिरफ्तारी के बाद वकील को बुला सकते हैं?
हां। आप पूछताछ के दौरान भी अपनी पसंद के वकील से मिलने की माँग कर सकते हैं, हालाँकि पूरी पूछताछ में साथ रहना ज़रूरी नहीं। खर्च न उठा सकें तो मुफ्त कानूनी सहायता माँगें।
क्या किसी महिला को रात में गिरफ्तार किया जा सकता है?
आम तौर पर नहीं। असाधारण परिस्थितियों में मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति से ही ऐसा हो सकता है, और गिरफ्तारी महिला अधिकारी द्वारा या उसकी मौजूदगी में होनी चाहिए।
अपनी स्थिति में मदद चाहिए?
हर मामला अलग होता है। हमें बताइए क्या हुआ, हमारी टीम उसकी समीक्षा कर आपको सही अगले कदम की ओर मार्गदर्शन देगी।




