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किरायेदार के अधिकार: सिक्योरिटी डिपॉज़िट, किराया और बेदखली

सिक्योरिटी डिपॉज़िट, रेंट एग्रीमेंट और बेदखली पर कानून क्या कहता है, और मकान मालिक डिपॉज़िट न लौटाए तो आपको कौन-से कदम उठाने चाहिए।

न्याय घर टीमप्रकाशित 7 मिनट में पढ़ें

इस मार्गदर्शिका में

भारत में किरायेदार के रूप में लिखित किरायानामा ज़रूर बनवाएँ। आपको घर का शांतिपूर्ण इस्तेमाल, पानी-बिजली जैसी ज़रूरी सुविधाएँ और घर छोड़ते समय जायज़ कटौती के बाद अपना सिक्योरिटी डिपॉज़िट वापस पाने का अधिकार है। मकान मालिक कानूनी प्रक्रिया के बिना आपको घर से नहीं निकाल सकता। बारीक नियम आपके राज्य के किराया कानून पर निर्भर करते हैं।

किरायेदारों की सुरक्षा कौन-सा कानून करता है?

किरायेदारी मुख्य रूप से राज्य के कानून से चलती है। ज़्यादातर राज्यों का अपना किराया नियंत्रण या किरायेदारी कानून है, और नोटिस की अवधि, बेदखली के आधार और किराया बढ़ाने जैसे नियम हर राज्य में अलग-अलग हैं।

2021 में केंद्र सरकार ने मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 जारी किया। यह एक आदर्श कानून है, यानी यह वहीं लागू होता है जहाँ किसी राज्य ने इसे किसी रूप में अपनाया हो। अगर आपके राज्य ने इसे नहीं अपनाया है, तो ज़्यादातर सवालों का जवाब राज्य का अपना किराया कानून और आपके एग्रीमेंट की शर्तें देंगी। फिर भी यह मॉडल कानून बताता है कि निष्पक्ष व्यवस्था कैसी होनी चाहिए, और इसके कई प्रावधान अब आम रेंट एग्रीमेंट में भी दिखने लगे हैं।

मकान मालिक कितना सिक्योरिटी डिपॉज़िट ले सकता है?

मॉडल किरायेदारी अधिनियम के तहत सिक्योरिटी डिपॉज़िट की अधिकतम सीमा है:

  • रिहायशी मकान के लिए दो महीने का किराया
  • गैर-रिहायशी (व्यावसायिक) जगह के लिए छह महीने का किराया

यह सीमा केवल उन्हीं राज्यों में बाध्यकारी है जिन्होंने मॉडल कानून अपनाया है। बाकी जगहों पर डिपॉज़िट उतना होता है जितना आप और मकान मालिक तय करें, इसीलिए कुछ शहरों में आज भी कई महीनों का डिपॉज़िट माँगा जाता है। पैसा देने से पहले अपने राज्य के मौजूदा नियम देख लें, और ध्यान रखें कि डिपॉज़िट की रकम और उसे कब व कैसे लौटाया जाएगा, यह एग्रीमेंट में साफ़ लिखा हो।

रेंट एग्रीमेंट 11 महीने का ही क्यों बनता है?

रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 के अनुसार साल-दर-साल, एक साल से ज़्यादा की अवधि या सालाना किराये वाला अचल संपत्ति का पट्टा (लीज़) रजिस्टर कराना ज़रूरी है। रजिस्ट्रेशन में स्टांप ड्यूटी लगती है और सब-रजिस्ट्रार दफ़्तर जाना पड़ता है, इसलिए बहुत से मकान मालिक और किरायेदार 11 महीने का एग्रीमेंट बनाकर उसे हर बार नवीनीकृत कर लेते हैं।

11 महीने का एग्रीमेंट भी वैध अनुबंध है, पर यह नियम हर जगह एक जैसा नहीं है। महाराष्ट्र में महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम, 1999 की धारा 55 के अनुसार लीव एंड लाइसेंस समझौता या किरायेदारी लिखित और रजिस्टर्ड होनी चाहिए, और इसमें कोई न्यूनतम अवधि नहीं बताई गई है। लिखित और हस्ताक्षरित किरायानामा, और जहाँ कानून कहे वहाँ रजिस्टर्ड, किराये, डिपॉज़िट और बाकी शर्तों का आपका सबसे मज़बूत सबूत है। मॉडल कानून के तहत हर किरायेदारी समझौता लिखित होना चाहिए और उस कानून के तहत बनी रेंट अथॉरिटी को सौंपा जाना चाहिए।

किरायेदार के रूप में आपके क्या अधिकार हैं?

आप किसी भी राज्य में हों, कुछ सुरक्षाएँ आम तौर पर मान्य हैं:

  • कानूनी प्रक्रिया के बिना बेदखली नहीं। मकान मालिक अपनी मर्ज़ी से आपको बाहर नहीं निकाल सकता, ताला नहीं बदल सकता और आपका सामान नहीं हटा सकता। बेदखली कानून के मुताबिक ही होगी, जिसके लिए आम तौर पर सक्षम प्राधिकरण या अदालत का आदेश चाहिए।
  • ज़रूरी सुविधाएँ नहीं काटी जा सकतीं। घर खाली कराने के दबाव में पानी, बिजली या दूसरी ज़रूरी सेवाएँ बंद करना गलत है।
  • निजता और शांतिपूर्ण इस्तेमाल। मकान मालिक मरम्मत या निरीक्षण के लिए आ सकता है, लेकिन आम तौर पर पहले सूचना देकर और उचित समय पर, जैसा आपका एग्रीमेंट या राज्य का कानून कहे।
  • हर भुगतान की रसीद। किराये और डिपॉज़िट के हर भुगतान की रसीद माँगें, या बैंक ट्रांसफ़र से भुगतान करें ताकि पक्का रिकॉर्ड रहे।
  • डिपॉज़िट की वापसी। किरायेदारी खत्म होने पर जायज़ कटौती, जैसे बकाया किराया या सामान्य टूट-फूट से ज़्यादा नुकसान की लागत, घटाकर डिपॉज़िट लौटाना होगा।

आपकी भी कुछ ज़िम्मेदारियाँ हैं: समय पर किराया देना, जगह का इस्तेमाल तय काम के लिए ही करना, नुकसान न पहुँचाना, और घर छोड़ने से पहले एग्रीमेंट में लिखा नोटिस देना।

रेंट एग्रीमेंट पर दस्तख़त से पहले क्या जाँचें

  1. मकान मालिक की पहचान पक्की करें और देखें कि मकान उसी का है या उसे किराये पर देने का अधिकार उसके पास है।
  2. किराया, डिपॉज़िट की रकम, नोटिस अवधि, लॉक-इन अवधि और नवीनीकरण की शर्तें ध्यान से पढ़ें।
  3. मेंटेनेंस, बिजली, पानी और मरम्मत का खर्च कौन देगा, यह साफ़ कर लें।
  4. डिपॉज़िट कब लौटेगा और उसमें से क्या काटा जा सकता है, यह लिखवा लें।
  5. घर में शिफ़्ट होते समय हर कमरे, फ़िटिंग और मीटर रीडिंग की तारीख़ वाली फ़ोटो और वीडियो लें और उन्हें ईमेल या मैसेज से मकान मालिक को भेज दें।
  6. एग्रीमेंट की हस्ताक्षरित प्रति और सभी भुगतान के सबूत एक सुरक्षित जगह रखें।

सुझाव: शिफ़्ट होने के दिन खींची गई और तुरंत मकान मालिक को भेजी गई तस्वीरें, घर छोड़ते समय नुकसान को लेकर विवाद होने पर अक्सर सबसे काम का सबूत साबित होती हैं।

मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉज़िट वापस नहीं कर रहा? ये कदम उठाएँ

अगर मकान मालिक बिना ठोस वजह के डिपॉज़िट रोक ले, तो चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ें। कई विवाद पहले या दूसरे कदम पर ही सुलझ जाते हैं।

  1. घर ठीक से सौंपें। चाबियाँ लिखित नोट के साथ लौटाएँ, बकाया चुका दें, और घर छोड़ने के दिन खाली घर व आखिरी मीटर रीडिंग की तस्वीरें ले लें।
  2. लिखित माँग भेजें। ईमेल या मैसेज से तय तारीख़ तक डिपॉज़िट लौटाने को कहें और कटौती हो तो उसका पूरा ब्योरा माँगें।
  3. कानूनी नोटिस भेजें। जवाब न आए तो वकील के ज़रिए कानूनी नोटिस भेजें, जिसमें तथ्य, बकाया रकम और भुगतान की समय-सीमा लिखी हो।
  4. मध्यस्थता या लोक अदालत आज़माएँ। लोक अदालत में बिना कोर्ट फ़ीस के विवाद सुलझ सकता है और उसका फ़ैसला अंतिम होता है।
  5. दीवानी वसूली का मुकदमा करें। आखिरी रास्ते के तौर पर एग्रीमेंट, भुगतान के सबूत और तस्वीरों के साथ रकम वसूली का सिविल मुकदमा दायर किया जा सकता है।

हर बात लिखित में रखें। फ़ोन पर किए गए वादे बाद में साबित करना मुश्किल होता है।

मकान मालिक जबरदस्ती घर खाली कराए तो क्या करें?

अगर मकान मालिक बिजली-पानी काट दे, ताला लगा दे या धमकाए, तो तारीख़, मैसेज, तस्वीरें और गवाहों के नाम का रिकॉर्ड रखें और जल्द से जल्द किसी वकील से बात करें। जिन राज्यों ने मॉडल कानून अपनाया है, वहाँ रेंट अथॉरिटी सही मंच हो सकती है; बाकी जगह सिविल कोर्ट या राज्य के किराया कानून में बताया गया प्राधिकरण। हिंसा की धमकी मिले तो पुलिस से संपर्क करें और आपात स्थिति में 112 डायल करें।

अगर आप वकील का खर्च नहीं उठा सकते, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त कानूनी मदद के हकदार हो सकते हैं। इसके लिए हमारी मुफ्त कानूनी सहायता वाली मार्गदर्शिका पढ़ें।

न्याय घर कैसे मदद कर सकता है

किरायेदारी के सवाल आपके राज्य के कानून, आपके एग्रीमेंट और मामले के तथ्यों पर टिके होते हैं। न्याय घर के ज़रिए आप कानूनी सहायता का अनुरोध कर सकते हैं और ऐसे वकील से जुड़ सकते हैं जो आपके रेंट एग्रीमेंट की जाँच करे, रुके हुए डिपॉज़िट के लिए कानूनी नोटिस तैयार करे या बेदखली की धमकी पर सलाह दे। ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा संपत्ति कानून पेज देखें, और वकील से मिलने से पहले वकील से पहली मुलाकात की हमारी चेकलिस्ट पढ़ लें।

यह मार्गदर्शिका सामान्य कानूनी जानकारी है, आपके विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं।

न्याय घर टीम द्वारा संबंधित अधिनियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर, सामान्य जानकारी के लिए लिखी गई। कानून बदलते रहते हैं, इसलिए कोई कदम उठाने से पहले किसी योग्य अधिवक्ता से वर्तमान स्थिति जान लें।

आधिकारिक स्रोत

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मकान मालिक पूरा सिक्योरिटी डिपॉज़िट रख सकता है?

एग्रीमेंट के अनुसार सिर्फ़ जायज़ कटौती ही हो सकती है, जैसे बकाया किराया या सामान्य टूट-फूट से ज़्यादा नुकसान की लागत। कटौती का लिखित ब्योरा माँगें और गलत कटौती को लिखित माँग, कानूनी नोटिस, मध्यस्थता या सिविल मुकदमे से चुनौती दें।

क्या बिना रजिस्ट्रेशन वाला 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट मान्य है?

हाँ, यह आपके और मकान मालिक के बीच वैध अनुबंध है। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 17 के तहत साल-दर-साल, एक साल से ज़्यादा या सालाना किराये वाले पट्टे का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। राज्य का कानून इससे आगे जा सकता है: महाराष्ट्र में लीव एंड लाइसेंस समझौते का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। स्टांप ड्यूटी के नियम भी राज्य के हिसाब से बदलते हैं।

क्या मकान मालिक जब चाहे किराया बढ़ा सकता है?

किराया बढ़ाने के नियम आम तौर पर आपके एग्रीमेंट और राज्य के किराया कानून से तय होते हैं। अगर एग्रीमेंट में उसकी अवधि के लिए किराया तय है, तो बीच में किराया बढ़ाने के लिए आम तौर पर आपकी सहमति ज़रूरी है।

क्या मकान मालिक बिना बताए किराये के घर में आ सकता है?

आम तौर पर मरम्मत या निरीक्षण के लिए मकान मालिक को पहले सूचना देनी चाहिए और उचित समय पर आना चाहिए। अपने एग्रीमेंट की संबंधित शर्त और राज्य का किराया कानून ज़रूर देखें।

इस कानूनी सेवा के बारे में जानें: संपत्ति एवं भूमि विवाद

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