इस मार्गदर्शिका में
उपभोक्ता शिकायत ऑनलाइन करने के लिए ई-जागृति पोर्टल (e-jagriti.gov.in) पर पंजीकरण करें, चुकाई गई रकम के हिसाब से सही उपभोक्ता आयोग चुनें, शिकायत भरें, दस्तावेज़ अपलोड करें, लागू हो तो शुल्क भरें और जमा कर दें। समस्या के 2 साल के भीतर शिकायत की जा सकती है और वकील ज़रूरी नहीं है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तब आपकी रक्षा करता है जब आपने किसी सामान या सेवा के लिए पैसे दिए हों और बदले में खराब, अधूरी या भ्रामक चीज मिली हो। जैसे खराब मोबाइल या उपकरण, बिल्डर का कब्जा देने में देरी, बिना ठोस वजह बीमा दावा खारिज होना, बैंक का गलत शुल्क काटना, एयरलाइन का उड़ान रद्द कर पैसा न लौटाना, या ऑनलाइन विक्रेता का टूटा सामान बदलने से मना करना।
शिकायत से पहले: मामला सुलझाने की कोशिश करें
आयोग यह देखना चाहेगा कि आपने विक्रेता या सेवा देने वाली कंपनी को गलती सुधारने का उचित मौका दिया। कई बार इसी कदम से मामला बिना मुकदमे के निपट जाता है।
- कंपनी के कस्टमर केयर या शिकायत अधिकारी को ईमेल से लिखें और जवाब संभाल कर रखें।
- बताएँ कि क्या गड़बड़ हुई, कितना भुगतान किया और आप क्या चाहते हैं: रिफंड, बदला हुआ सामान, मरम्मत या हर्जाना।
- साफ समय सीमा दें, जैसे 15 दिन।
- आप 1915 पर कॉल करके राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह शिकायत को कंपनी तक पहुँचाती है और जवाब दिलाने में मदद कर सकती है।
बात न बने तो कानूनी नोटिस भेजना अनिवार्य नहीं, पर अक्सर उपयोगी होता है, क्योंकि इससे आपका दावा साफ शब्दों में रिकॉर्ड पर आ जाता है।
किस उपभोक्ता आयोग में शिकायत करें?
उपभोक्ता आयोग के तीन स्तर हैं। आपका मामला कौन सुनेगा, यह 2021 में अधिसूचित आर्थिक क्षेत्राधिकार नियमों के अनुसार उस सामान या सेवा की कीमत पर निर्भर है जिसके लिए आपने भुगतान किया:
- जिला आयोग: 50 लाख रुपये तक
- राज्य आयोग: 50 लाख से अधिक और 2 करोड़ रुपये तक
- राष्ट्रीय आयोग: 2 करोड़ रुपये से अधिक
रोजमर्रा की ज्यादातर शिकायतें, जैसे खराब उपकरण, रिफंड या मोबाइल बिल, जिला आयोग में जाती हैं। आप वहाँ शिकायत कर सकते हैं जहाँ आप रहते हैं या काम करते हैं, ज़रूरी नहीं कि वहाँ जहाँ कंपनी का दफ्तर है। इससे बड़ी कंपनी के खिलाफ भी अपने जिले से लड़ना आसान हो जाता है।
शिकायत की समय सीमा क्या है?
अधिनियम की धारा 69 के तहत शिकायत वाद-कारण पैदा होने, यानी खराबी या कमी होने या उसका पता चलने के 2 साल के भीतर करनी होती है। देरी का पर्याप्त कारण दिखाने पर आयोग बाद में भी शिकायत स्वीकार कर सकता है, पर इस पर भरोसा न करें। सुलझाने की उचित कोशिशें नाकाम होते ही शिकायत कर दें।
ये दस्तावेज़ तैयार रखें
शुरू करने से पहले इन्हें पीडीएफ या साफ फोटो के रूप में जुटा लें:
- बिल, इनवॉइस या रसीद और भुगतान का सबूत
- वारंटी कार्ड, पॉलिसी, अनुबंध या बुकिंग की पुष्टि
- कस्टमर केयर से हुए ईमेल, चैट के स्क्रीनशॉट और शिकायत संख्या
- खराबी की फोटो या वीडियो और मरम्मत की जॉब शीट
- कानूनी नोटिस भेजा हो तो उसकी प्रति और डिलीवरी का सबूत
- पहचान पत्र
ई-जागृति पर उपभोक्ता शिकायत ऑनलाइन कैसे करें
पुराना ई-दाखिल पोर्टल अब 1 जनवरी 2025 को शुरू हुए ई-जागृति में जोड़ दिया गया है। ई-दाखिल के पुराने लिंक शायद अब काम न करें।
- e-jagriti.gov.in पर जाएँ और पोर्टल से मिले वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) से पंजीकरण करें।
- लॉग-इन करके डैशबोर्ड पर "File New Case" और फिर "Consumer Complaint" चुनें।
- राज्य, जिला और आपकी चुकाई गई रकम के अनुसार सही आयोग चुनें।
- अपना ब्योरा और विरोधी पक्ष का नाम-पता भरें। हर जिम्मेदार पक्ष को शामिल करें, जैसे निर्माता और विक्रेता दोनों।
- तथ्यों को छोटे, क्रमवार पैराग्राफ में लिखें: क्या खरीदा, कब, क्या गड़बड़ हुई, आपने सुलझाने के लिए क्या किया और कंपनी ने क्या जवाब दिया।
- बताएँ कि आपको क्या राहत चाहिए: रिफंड, सामान बदलना, मरम्मत, नुकसान या परेशानी का हर्जाना और मुकदमे का खर्च।
- दस्तावेज़ और हस्ताक्षरित शिकायत अपलोड करें, साथ में पोर्टल जो हलफनामा माँगे वह भी।
- लागू हो तो शुल्क ऑनलाइन भरें। चुकाई गई रकम 5 लाख रुपये तक हो तो कोई शुल्क नहीं है; उससे ऊपर नियमों में तय शुल्क देना होता है।
- शिकायत जमा करें और पावती सहेज लें। आयोग फाइलिंग की जाँच करता है और स्वीकार करने से पहले कमियाँ ठीक करने को कह सकता है।
शिकायत स्वीकार होने के बाद आयोग विरोधी पक्ष को नोटिस भेजता है और उसे जवाब देने का मौका मिलता है। केस की स्थिति और सुनवाई की तारीखें आप ऑनलाइन देख सकते हैं।
सुझाव: शिकायत ऐसे लिखें मानो पढ़ने वाला विवाद के बारे में कुछ नहीं जानता। तारीख, रकम और दस्तावेज़ों के हवाले के साथ एक छोटी सी घटनाक्रम सूची आयोग के लिए मामला समझना बहुत आसान बना देती है।
क्या वकील ज़रूरी है?
नहीं। कानून आपको खुद शिकायत दायर करने और बहस करने की अनुमति देता है, और बहुत से लोग ऐसा करते भी हैं। फिर भी जब रकम बड़ी हो, तथ्य उलझे हों, विरोधी पक्ष के पास मजबूत वकील हों, या राहत सोच-समझकर माँगनी हो, जैसे बिल्डर की देरी या बीमा विवाद में, तब अधिवक्ता की मदद काम आती है।
आयोग क्या आदेश दे सकता है?
तथ्यों के आधार पर उपभोक्ता आयोग विरोधी पक्ष को सामान बदलने या ठीक करने, चुकाई गई रकम लौटाने, नुकसान या मानसिक पीड़ा का हर्जाना देने, अनुचित व्यापार व्यवहार बंद करने और मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दे सकता है। नतीजा हमेशा सबूतों और आपके मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है।
न्याय घर कैसे मदद कर सकता है
अगर तय न हो पा रहा हो कि कौन सा आयोग चुनें, राहत कैसे लिखें या कंपनी के जवाब का उत्तर कैसे दें, तो आप कानूनी सहायता का अनुरोध कर सकते हैं और उपभोक्ता विवादों पर काम करने वाले अधिवक्ता से जुड़ सकते हैं। अगर अपने मामले के समर्थन में किसी सरकारी विभाग से रिकॉर्ड चाहिए, तो पढ़ें आरटीआई ऑनलाइन कैसे करें। खर्च की चिंता हो तो जानिए मुफ्त कानूनी सहायता के बारे में।
यह मार्गदर्शिका सामान्य कानूनी जानकारी है, आपके विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं।
न्याय घर टीम द्वारा संबंधित अधिनियमों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के आधार पर, सामान्य जानकारी के लिए लिखी गई। कानून बदलते रहते हैं, इसलिए कोई कदम उठाने से पहले किसी योग्य अधिवक्ता से वर्तमान स्थिति जान लें।
आधिकारिक स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता शिकायत हो सकती है?
हां। ऑनलाइन की गई खरीद भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के दायरे में आती है। ऑर्डर का ब्योरा, इनवॉइस, चैट रिकॉर्ड और डिलीवरी का सबूत रखें, और ज़रूरत हो तो प्लेटफ़ॉर्म और विक्रेता दोनों को पक्षकार बनाएं।
उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने की फीस कितनी है?
चुकाई गई रकम 5 लाख रुपये तक हो तो कोई शुल्क नहीं लगता। इससे ऊपर नियमों में तय शुल्क लगता है, जिसे ई-जागृति पर ऑनलाइन भरा जा सकता है।
क्या मैं अपने शहर में ही शिकायत दर्ज कर सकता हूँ?
हां। आप वहाँ शिकायत कर सकते हैं जहाँ आप रहते हैं या काम करते हैं, भले ही कंपनी कहीं और की हो।
अगर 2 साल की समय सीमा निकल गई हो तो?
देरी का पर्याप्त कारण बताने पर आयोग देर से आई शिकायत भी स्वीकार कर सकता है, पर यह उसके विवेक पर है। समय सीमा नजदीक हो या निकल चुकी हो, तो जल्द सलाह लें।
अपनी स्थिति में मदद चाहिए?
हर मामला अलग होता है। हमें बताइए क्या हुआ, हमारी टीम उसकी समीक्षा कर आपको सही अगले कदम की ओर मार्गदर्शन देगी।




